बिहार में नर्सिंग की पढ़ाई: एक तरफ़ बड़ी भर्तियां, दूसरी तरफ़ मान्यता ख़त्म
बिहार के दर्जनों नर्सिंग कॉलेजों की राष्ट्रीय मान्यता ख़त्म हो चुकी है, वहीं राज्य 22,000 नर्सिंग पद निकाल रहा है। फ़ीस देने से पहले क्या जांचें।

प्रकाशित 9 अक्टूबर 2026
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नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले हर स्टूडेंट और पैरेंट को क्या पता होना चाहिए।
एक कहानी जो हर साल दोहराई जा रही है
पटना की बी.एससी. नर्सिंग तीसरे साल की एक स्टूडेंट ने सीधे शब्दों में कहा, “हमारा सेशन अभी तक पूरा नहीं हुआ है। एडमिशन के वक़्त कहा गया था कि 2027 तक कोर्स पूरा हो जाएगा। अब तक सिर्फ़ तीसरे और चौथे सेमेस्टर का एग्ज़ाम ही हुआ है।”
बिहार में हज़ारों नर्सिंग स्टूडेंट्स यही बात कह रहे हैं। एग्ज़ाम लेट हो रहे हैं। रिज़ल्ट लेट हो रहे हैं। सेशन दो से तीन साल पीछे चल रहा है। और ऊपर से दर्जनों कॉलेजों की राष्ट्रीय मान्यता भी ख़त्म हो गई है।
वहीं दूसरी तरफ़, बिहार में पहले से ज़्यादा नर्सिंग की भर्तियां निकल रही हैं, स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मिलाकर 22,000 से ज़्यादा पद।
तो सवाल यह है, जब इतनी नौकरियां हैं तो इतनी दिक्कत क्यों है? इस लेख में हम दोनों पक्षों को ईमानदारी से समझाएंगे, सिर्फ़ आधिकारिक जानकारी के आधार पर। अगर आप या आपके बच्चे बिहार में नर्सिंग की पढ़ाई की सोच रहे हैं, तो एक पैसा लगाने से पहले यह पढ़ लीजिए।
भाग 1: मान्यता ख़त्म होने की पूरी कहानी
भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) ने मान्यता वापस ली
देश की सबसे बड़ी नर्सिंग नियामक संस्था, भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) ने INC अधिनियम, 1947 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की।
क्या हुआ:
- INC ने कई नर्सिंग संस्थानों को नोटिस भेजा और राज्य सरकार तथा बिहार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (BNRC) से पूछा कि ये कॉलेज नर्सिंग कोर्स चलाने लायक हैं या नहीं।
- कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया।
- INC के रिकॉर्ड से पता चला कि ये संस्थान कई सालों से ज़रूरी जांच (इंस्पेक्शन) के लिए आवेदन ही नहीं कर रहे थे और कोर्स चलाने के लिहाज़ से कमज़ोर और अयोग्य पाए गए।
नतीजा:
- 10 मार्च 2025 को INC ने कई अलग अलग संस्थानों के लिए मान्यता वापसी का आदेश जारी किया, जो 26 अक्टूबर 2024 से प्रभावी है।
- 8 सितंबर 2025 को INC ने एक बड़ा आदेश जारी किया, जिसमें बिहार के 21 नर्सिंग संस्थानों की मान्यता 19 मार्च 2025 से वापस ले ली गई।
- अलग अलग मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ बिहार में प्रभावित संस्थानों की संख्या 21 से 40 के बीच है।
“मान्यता ख़त्म” का स्टूडेंट के लिए क्या मतलब है?
यह बात हर फ़ैमिली को साफ़ समझनी चाहिए।
अगर आप ऐसे संस्थान में पढ़ते हैं जिसकी मान्यता वापस ले ली गई है, तो आपकी डिग्री सिर्फ़ बिहार के अंदर चलेगी।
आसान शब्दों में:
- आप बिहार से बाहर किसी नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते।
- केंद्र सरकार के अस्पताल, AIIMS या रेलवे की नर्सिंग नौकरी के लिए योग्य नहीं होंगे।
- विदेश में पढ़ाई या नर्स की नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते।
- बिहार से बाहर नर्सिंग की किसी भी वैकेंसी से बाहर हो जाएंगे।
BNRC की अध्यक्ष डॉ. रेखा झा ने बताया कि यह कार्रवाई पुराने स्टूडेंट्स पर भी लागू होती है, क्योंकि संस्थान तय मानकों को नज़रअंदाज़ कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान कमियां दूर करके फिर से मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन जो स्टूडेंट्स फ़ीस दे चुके हैं और पढ़ चुके हैं, उनका नुकसान तो हो ही चुका है।
मान्यता क्यों ख़त्म हुई?
लगभग सभी प्रभावित कॉलेजों की वजहें एक जैसी हैं:
- क्लिनिकल सुविधाएं कमज़ोर (ज़रूरी बेड नहीं, अस्पताल से ठीक अफ़िलिएशन नहीं)
- पढ़ाई की सुविधाएं ख़राब (लैब बंद, पुरानी या गायब लाइब्रेरी, स्किल लैब नहीं)
- फ़ैकल्टी की कमी, और कहीं तो बिना ज़रूरी डिग्री वाले टीचर
- प्रबंधन की लापरवाही, कई सालों तक जांच के लिए आवेदन ही नहीं किया
- कुछ प्राइवेट कॉलेज सिर्फ़ दो कमरे में चल रहे थे
यह छोटी बात नहीं है। यह सीधा इस सवाल से जुड़ा है कि बिहार में ली गई नर्सिंग की डिग्री की क़ीमत बिहार के बाहर क्या है।
भाग 2: नौकरी का उल्टा खेल, वैकेंसी है, लेकिन अप्लाई कौन करे?
यह सबसे अजीब हिस्सा है।
नौकरियां असली हैं
| पद | कितने | भर्ती करने वाला |
|---|---|---|
| स्टाफ नर्स | 11,389 | बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) |
| एएनएम (NHM) | 5,006 | राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार |
| पहले से लंबित | 10,700 | स्वास्थ्य विभाग |
| कुल घोषित | ~22,089 | स्वास्थ्य मंत्री का बयान, मई 2025 |
नंबर बहुत अच्छे लगते हैं। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक़ पिछले पांच साल में करीब 19,000 एएनएम और जीएनएम नर्सों की भर्ती भी हो चुकी है।
लेकिन एक शर्त है
इनमें से लगभग हर भर्ती के लिए ज़रूरी है:
- किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से जीएनएम या बी.एससी. नर्सिंग की योग्यता, और
- BNRC में रजिस्ट्रेशन।
अब जोड़कर देखिए:
- अगर आपके कॉलेज की INC मान्यता ख़त्म हो गई, तो आपकी योग्यता केंद्र की नौकरी के लिए नहीं चलेगी, और कई मामलों में सिर्फ़ बिहार तक सीमित रहेगी।
- अगर BUHS की देरी के कारण आपका एग्ज़ाम या रिज़ल्ट पेंडिंग है, तो कोर्स ही पूरा नहीं होगा, तो रजिस्ट्रेशन कैसे होगा?
मतलब साफ़ है। नौकरी का विज्ञापन और स्टूडेंट की हक़ीक़त, दोनों अलग अलग पटरी पर चल रहे हैं। सरकार कहती है “अप्लाई करो”, लेकिन बहुत से स्टूडेंट्स अप्लाई ही नहीं कर पाते, क्योंकि उनका कोर्स पूरा नहीं हुआ या उनके कॉलेज की मान्यता ही ख़त्म हो गई।
कागज़ी कार्रवाई का जाल
बिहार से बाहर के स्टूडेंट्स के लिए बिहार नर्सिंग कैडर रूल्स, 2024 में तो यह शर्त भी थी कि बिहार से बाहर के संस्थानों से जीएनएम करने वालों के पास INC का उपयुक्तता प्रमाणपत्र हो। इस पर कोर्ट में चुनौती दी गई। बाद में राज्य ने नियम बदल दिए (बिहार नर्सिंग कैडर (संशोधन) नियमावली, 2026, 25 फ़रवरी 2026 को अधिसूचित), और पटना हाई कोर्ट ने याचिका को ज़रूरत से बाहर मानकर निपटा दिया। बात यह है कि नियम बदलते रहे हैं, और स्टूडेंट्स को उनके साथ चलना पड़ा है।
भाग 3: यह सब हो क्यों रहा है?
ईमानदारी और संतुलन के लिए यह समझना ज़रूरी है।
BUHS और BNRC का टकराव
साल 2021 में बिहार ने बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज़ अधिनियम पास किया। इससे BUHS बना, जो राज्य के सभी हेल्थ साइंस संस्थानों के लिए एक ही अफ़िलिएशन और एग्ज़ाम देने वाला विश्वविद्यालय है।
मार्च 2024 में सरकार ने आदेश जारी कर नर्सिंग, पैरामेडिकल, फ़ार्मेसी, डेंटल और लैब टेक्नीशियन कोर्स से जुड़े संस्थानों की अफ़िलिएशन और एग्ज़ाम का अधिकार BUHS को दे दिया।
लेकिन BNRC, जो पुराने बिहार एंड ओरिसा नर्सेस रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1935 और नर्सिंग रूल्स 1997 से चलती है, का कहना था कि अफ़िलिएशन और एग्ज़ाम उसका काम रहा है।
कई प्राइवेट संस्थान पटना हाई कोर्ट गए। अक्टूबर 2024 में हाई कोर्ट ने BUHS के अधिकार को सही ठहराया, यह कहते हुए कि BUHS अधिनियम 2021 पुराने नियमों पर भारी है। फिर मामला अपील में चला गया, और प्रक्रिया फिर अटक गई।
इसका स्टूडेंट्स पर क्या असर हुआ
आगे पीछे होने की वजह से:
- 2023-24 बैच के करीब 50,000 स्टूडेंट्स का पहले साल का एग्ज़ाम एडमिशन के दो साल बाद तक नहीं हुआ।
- 2024-25 बैच के 50,000 से ज़्यादा स्टूडेंट्स एडमिशन ले चुके थे, पर फंसे हुए थे।
- केयर्स360 के मुताबिक़ नर्सिंग, पैरामेडिकल, फ़ार्मेसी और आयुष कोर्स, मिलाकर करीब 2 लाख स्टूडेंट्स देरी से परेशान थे।
BUHS का एग्ज़ाम संकट
BUHS ने ख़ुद माना कि वह दबाव में है:
- उसे 56 कोर्स के लिए 126 एग्ज़ाम कराने हैं, और हर कोर्स का नियामक अलग।
- उसके पास 92 स्वीकृत पद हैं, पर कई खाली हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग से स्टाफ मंगाना पड़ता है।
- इसके कुलपति IGIMS के भी डायरेक्टर हैं, यानी पूरा समय BUHS में नहीं दे पाते।
स्टूडेंट्स ने यह भी बताया:
- हर सेमेस्टर एग्ज़ाम फ़ीस ₹5,850, जबकि पहले ₹2,850 सालाना थी।
- रिज़ल्ट दोबारा जांचने (री-एवैल्यूएशन) का कोई इंतज़ाम नहीं, इसलिए फेल स्टूडेंट को सप्लीमेंट्री एग्ज़ाम देना पड़ता है और फिर फ़ीस भरनी पड़ती है।
- बड़े पैमाने पर फेल: 2024-28 बी.एससी. नर्सिंग के पहले सेमेस्टर में करीब 44% फेल, 2023-27 के तीसरे सेमेस्टर में करीब 74% फेल, कुछ प्राइवेट कॉलेजों में 80 से 90% फेल।
इसी वजह से अगस्त और सितंबर 2025 में पटना, समस्तीपुर, वैशाली, सीवान और पूर्णिया में प्रदर्शन हुए। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, कुछ स्टूडेंट और पुलिसकर्मी घायल हुए, और 500 से ज़्यादा स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ FIR दर्ज हुई।
भाग 4: सुधार की तरफ़, सरकार क्या कर रही है
संतुलन के लिए यह बताना भी ज़रूरी है कि सरकार चुप नहीं बैठी है। कुछ सुधार सच में हो रहे हैं।
डिजिटल अप्रूवल सिस्टम (1 अप्रैल 2025 से)
स्वास्थ्य विभाग ने नए नर्सिंग कॉलेजों की मंज़ूरी के लिए पूरी तरह ऑनलाइन और समयबद्ध व्यवस्था शुरू की:
- ऑनलाइन आवेदन के 6 हफ़्ते में लेटर ऑफ़ परमिशन (LoP)
- इंफ़्रास्ट्रक्चर पूरा करने के लिए 12 महीने (पहले 9 थे)
- 50 से 70 इंस्पेक्टर के पूल से 7 दिन में जांच टीम तय
- जांच के लिए आवेदन के 2 महीने में एनओसी (NOC)
- LoP और NOC दोनों एक ही अफ़सर देखेगा, पहले की दोहरी व्यवस्था ख़त्म
करीब 200 आवेदन, कुछ तो तीन साल से ज़्यादा पुराने, लंबित थे। इस सिस्टम से इन्हें निपटाना है।
मिशन उन्नयन और Jhpiego
Jhpiego एक अंतरराष्ट्रीय, ग़ैर-मुनाफ़ा स्वास्थ्य संस्था है और अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई है, जो भारत में 1980 के दशक से सरकारों के साथ काम कर रही है। बिहार में यह मिशन उन्नयन के तहत स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग सुधारों में, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन के सहयोग से मदद करती है, और BUHS को नर्सिंग शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था सुधारने तथा INC मानकों के मुताबिक़ कम्पीटेंसी आधारित नर्सिंग शिक्षा लागू करने में सहयोग करती है।
बिहार से इसका जुड़ाव नया नहीं है। इससे पहले बिहार सरकार और राज्य स्वास्थ्य समिति ने नर्स व मिडवाइफ़ की प्री-सर्विस एजुकेशन मज़बूत करने के लिए Jhpiego के साथ देश की पहली ऐसी परियोजना की थी, जिसके तहत भारतीय नर्सिंग परिषद का देश का छठा नोडल सेंटर IGIMS, पटना में बनाया गया। मिशन उन्नयन, स्वास्थ्य विभाग और BNRC के सात नर्सिंग सुधारों का कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य कम से कम 5,000 उच्च गुणवत्ता वाली नर्सों को सर्टिफ़ाई करना और 1,000 नर्सों को विदेश में नौकरी दिलाने में मदद करना है।
जुलाई 2026 के सुधार फ़ैसले
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ:
- एएनएम स्कूलों को चरणबद्ध तरीक़े से जीएनएम, और योग्य जीएनएम को बी.एससी. नर्सिंग में बदला जाएगा
- 498 स्वीकृत फ़ैकल्टी पद जल्द भरने हैं, साथ ही 270 ट्यूटर सरकारी संस्थानों में भेजे जाएंगे
- संस्थानों के लिए डिजिटल सेल्फ़-सर्टिफ़िकेशन, और बायोमेट्रिक हाज़िरी व CCTV केंद्रीय कमांड सेंटर से जुड़ेंगे
- हर संस्थान को लाइब्रेरी और किताबों के लिए ₹5 लाख की मदद पर विचार
- सभी नर्सिंग संस्थानों की जियो-टैगिंग और GIS मैपिंग
- नर्स प्रैक्टिशनर इन क्रिटिकल केयर कोर्स की शुरुआत
- सात निश्चय योजना के तहत बचा निर्माण काम जल्द पूरा करना
ईमानदार आकलन
ये सुधार अच्छे कदम हैं और दिशा सही है। लेकिन ये उस सिस्टम की मरम्मत हैं जो लाखों स्टूडेंट्स के लिए दो से तीन साल पहले ही पीछे छूट चुका है। सिर्फ़ डिजिटल पोर्टल और CCTV से ख़त्म हुई मान्यता वापस नहीं आती, और पेंडिंग रिज़ल्ट जारी नहीं होते। असली सुधार तब दिखेगा जब:
- BUHS और BNRC का विवाद हमेशा के लिए तय हो।
- पेंडिंग एग्ज़ाम और रिज़ल्ट सच में जारी हों।
- फ़ैकल्टी के पद सच में भरें, सिर्फ़ आदेश न हों।
- मान्यता खो चुके कॉलेज कमियां दूर करके फिर से जांच कराएं।
भाग 5: एडमिशन से पहले, आपके लिए ज़रूरी बातें
अगर आप स्टूडेंट या पैरेंट हैं, तो यह आसान चेकलिस्ट याद रखें।
1. तीनों मान्यता जांचिए
बिहार में नर्सिंग कॉलेज के हर कोर्स के लिए ज़रूरी है:
- INC मान्यता (भारतीय नर्सिंग परिषद)
- BUHS अफ़िलिएशन (बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज़)
- BNRC मान्यता (बिहार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल)
तीनों के लेटर नंबर और तारीख़ मांगिए। अच्छा कॉलेज तुरंत दिखा देगा। जिस कॉलेज की INC मान्यता ख़त्म हो चुकी है, वह सिर्फ़ “राज्य की मंज़ूरी” बताकर बच सकता है, इसलिए INC की स्थिति अलग से जांचिए।
2. INC की मान्यता वापसी लिस्ट देखिए
फ़ीस देने से पहले पक्का करें कि आपका कॉलेज INC की लिस्ट में नहीं है। लिखित सबूत मांगिए, ज़ुबानी वादों पर भरोसा न करें।
3. एग्ज़ाम और रिज़ल्ट का इतिहास पूछिए
पूछिए कि पिछले दो साल में कितने बैचों का रिज़ल्ट समय पर आया? अगर जवाब गोलमोल हो, तो सतर्क रहें।
4. “सिर्फ़ बिहार” का मतलब समझिए
जिस कॉलेज की INC मान्यता ख़त्म, वहां से डिग्री सिर्फ़ बिहार में चलेगी। यानी कोई केंद्र की नौकरी नहीं, दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन नहीं, विदेश नहीं। बहुत फ़ैमिली के लिए कोर्स का पूरा मक़सद यही होता है।
5. फ़ीस स्ट्रक्चर ध्यान से पढ़िए
एग्ज़ाम फ़ीस, सप्लीमेंट्री फ़ीस और “सेशन बढ़ने” का कोई चार्ज, सब लिखित में लीजिए।
6. हर कागज़ संभालकर रखिए
फ़ीस रसीद, एडमिट कार्ड, एनरोलमेंट स्लिप और प्रैक्टिकल की हाज़िरी संभालकर रखें। दिक्कत आने पर यही आपका सबूत होंगे।
निष्कर्ष
बिहार की नर्सिंग शिक्षा फ़िलहाल एक मुश्किल दौर से गुज़र रही है। सच में सुधार भी हो रहे हैं और सच में नौकरियां भी हैं, लेकिन सच में ख़तरा भी है। कॉलेजों की राष्ट्रीय मान्यता ख़त्म हुई है, एग्ज़ाम लेट हैं, और क़ीमत स्टूडेंट चुका रहा है।
संतुलित सच यह है: राज्य उस सिस्टम को ठीक करने की कोशिश कर रहा है जिसे सालों तक ढीला छोड़ दिया गया था। सुधार शुरू हो चुके हैं, लेकिन आज के स्टूडेंट सुधार पूरा होने का इंतज़ार नहीं कर सकते।
इसलिए अभी सबसे ज़रूरी काम है एडमिशन से पहले जांच पड़ताल। मान्यता के लेटर देखिए। INC की लिस्ट देखिए। सख़्त सवाल पूछिए। आज की थोड़ी मेहनत, आगे के सालों की मुश्किल बचा सकती है।
बिहार के बाहर भी विकल्प देख रहे हैं? पढ़िए, B.Sc Nursing और GNM के लिए बेंगलुरु क्यों गंभीरता से देखने लायक है।
बिहार में सही नर्सिंग कॉलेज चुनने में मदद चाहिए?
यहीं पर Admisonian EduCare आपके काम आ सकती है।
हम फ़ैमिली की मदद करते हैं:
- किसी भी नर्सिंग कॉलेज की INC, BUHS और BNRC मान्यता वेरिफ़ाई करने में
- पूरी तरह मान्यता प्राप्त और समय पर चल रहे कॉलेजों की तुलना करने में
- फ़ीस, लोन (जैसे बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड) और योग्यता समझने में
- आपके नर्सिंग करियर की योजना बनाने में, चाहे बी.एससी. हो, जीएनएम हो या एएनएम
सिर्फ़ ब्रोशर या फ़ोन के वादे पर भरोसा न करें। पहले सही जानकारी लें। नीचे दिया फ़ॉर्म भर दीजिए, या फ़ोन नंबर और ऑफ़िस के पते के लिए हमारा संपर्क पेज देखिए।
आपके करियर को ऐसा कॉलेज चाहिए जो सच में मान्यता प्राप्त हो। आइए, उसे ढूंढने में हम आपकी मदद करें।
स्रोत
- भारतीय नर्सिंग परिषद के मान्यता वापसी आदेश, भारत का राजपत्र (2024-2025)
- बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज़ (buhs.ac.in), अफ़िलिएटेड कॉलेज सूची, प्रॉस्पेक्टस
- बिहार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (bnrc.bihar.gov.in, bnrc2.bihar.gov.in)
- Jhpiego (jhpiego.org), बिहार में नर्सिंग और मिडवाइफ़री प्री-सर्विस एजुकेशन, मिशन उन्नयन में तकनीकी सहयोग
- बिहार स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचनाएं और समीक्षा बैठक के फ़ैसले
- BUHS के अधिकार पर पटना हाई कोर्ट का फ़ैसला (अक्टूबर 2024)
- बिहार नर्सिंग कैडर (संशोधन) नियमावली, 2026
- बिहार तकनीकी सेवा आयोग स्टाफ नर्स भर्ती 2025 (विज्ञापन 23/2025)
- राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार एएनएम भर्ती 2025
- केयर्स360, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, मेडिकल डायलॉग्स, टेलीग्राफ़ इंडिया, ईटीवी भारत, लाइव हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, जागरण, 22स्कोप न्यूज़
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। एडमिशन लेने से पहले INC, BUHS और BNRC से मान्यता की ताज़ा स्थिति ज़रूर जांच लें।